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Stop Loss क्या है? (शेयर बाज़ार के भयंकर क्रैश में अपने पैसों को ज़ीरो होने से बचाने वाला ‘ब्रह्मास्त्र’)

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स्वागत है दोस्तों ‘Stock Shorts’ पर! ऋषभ यहाँ।

कल्पना कीजिए कि आप 150 किमी/घंटा की रफ्तार से एक स्पोर्ट्स कार चला रहे हैं, लेकिन उस कार में ‘ब्रेक’ (Brakes) और ‘सीटबेल्ट’ ही नहीं है! क्या आप ऐसी कार में बैठेंगे? बिल्कुल नहीं।

लेकिन शेयर बाज़ार में 90% रिटेल निवेशक यही गलती करते हैं। वो शेयर तो खरीद लेते हैं, लेकिन उसमें ‘ब्रेक’ नहीं लगाते। और जब बाज़ार क्रैश होता है, तो उनका पूरा पोर्टफोलियो तबाह हो जाता है। इस तबाही से बचाने वाले जादुई ब्रेक को ही ‘Stop-Loss’ (स्टॉप-लॉस) कहते हैं।

Stop-Loss क्या है? 🛡️

आसान भाषा में, यह आपके डीमैट अकाउंट में सेट किया गया एक ‘ऑटोमैटिक कमांड’ (कम्प्यूटर को दिया गया निर्देश) है, जो आपके घाटे (Loss) को एक सीमा पर रोक (Stop) देता है।

यह काम कैसे करता है? (एक रियल लाइफ उदाहरण) 📉

  • मान लीजिए आपने Paytm का शेयर ₹1000 में खरीदा। आप तय करते हैं कि “मैं इस शेयर में 100 रुपये से ज़्यादा का नुकसान नहीं सह सकता।”
  • तो आप ₹900 पर अपना ‘स्टॉप-लॉस’ सिस्टम में लगा देते हैं।
  • अब मान लीजिए कोई बहुत बुरी खबर आ गई और शेयर अचानक क्रैश होकर सीधे ₹500 पर आ गिरा!
  • जादू: चूँकि आपने ₹900 का स्टॉप-लॉस लगाया था, आपका ब्रोकर ₹900 आते ही आपके शेयर को ऑटोमैटिकली बेच देगा। आपका नुकसान सिर्फ 100 रुपये का हुआ, जबकि बाकी लोग 500 रुपये के भारी घाटे में फंस गए!

Stock Shorts का ‘Golden Rule’ 🏆:

चाहे आप कितने भी बड़े एक्सपर्ट हों, बाज़ार में कभी भी बिना स्टॉप-लॉस के कोई ट्रेड न लें। मुनाफ़ा (Profit) कमाना बाद की बात है, शेयर बाज़ार का पहला नियम है— “अपनी कैपिटल (मूलधन) को बचाना!”

✍️ By Rishabh Singh | Stock Shorts

(Disclaimer: यह लेख वित्तीय शिक्षा के लिए है। स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल एक अच्छी ट्रेडिंग आदत है।)

    Rishabh singh

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