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शेयर बाज़ार क्रैश (Market Crash) से अपने पोर्टफोलियो को कैसे बचाएं? 4 अचूक तरीके!

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नमस्कार दोस्तों! शेयर बाज़ार में जब हर तरफ हरियाली (Bull Market) होती है, तो हर कोई पैसा कमाता है। लेकिन असली निवेशक की पहचान तब होती है जब बाज़ार में अचानक कोई ‘क्रैश’ (Market Crash) या भारी गिरावट आती है। लाल रंग से रंगे हुए पोर्टफोलियो को देखकर अच्छे-अच्छे निवेशकों के पसीने छूट जाते हैं।

आज ‘Stock Shorts’ की इस बेहद ज़रूरी मास्टरक्लास में हम आपको उन 4 अचूक तरीकों के बारे में बताएंगे, जिनसे आप न सिर्फ अपने पोर्टफोलियो को क्रैश से बचा सकते हैं, बल्कि गिरावट को भी मुनाफे के एक शानदार मौके में बदल सकते हैं।

1. घबराकर अपने शेयर न बेचें (Do Not Panic Sell)

जब बाज़ार 10% या 20% गिरता है, तो ज़्यादातर लोग डर के मारे अपने अच्छी कंपनियों के शेयर भी घाटे में बेच देते हैं। ऐतिहासिक डेटा (Verified Data) बताता है कि चाहे 2008 की भयंकर मंदी हो या 2020 का कोरोना क्रैश, शेयर बाज़ार हमेशा रिकवर (Recover) करता है और नए रिकॉर्ड हाई (Record High) बनाता है। अगर आपकी कंपनी के फंडामेंटल्स मज़बूत हैं, तो चुपचाप होल्ड (Hold) करें।

2. डायवर्सिफिकेशन (Diversification) का नियम अपनाएं

अंग्रेजी में एक कहावत है— “Never put all your eggs in one basket” (अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें)। अपना सारा पैसा सिर्फ शेयर बाज़ार में न लगाएं।

एक मज़बूत पोर्टफोलियो में ये 3 चीज़ें होनी चाहिए:

  • Equity (शेयर बाज़ार): 60-70% (लंबी ग्रोथ के लिए)
  • Debt / FD (फिक्स्ड डिपॉजिट/बॉन्ड): 20% (सुरक्षा के लिए)
  • Gold (सोना): 10-15% (जब शेयर बाज़ार गिरता है, तो अक्सर सोने के दाम बढ़ जाते हैं, जो आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस करता है)।

3. कैश (Cash) हमेशा तैयार रखें

एक समझदार निवेशक कभी भी अपना पूरा 100% पैसा एक साथ बाज़ार में नहीं लगाता। अपने पास हमेशा कुछ ‘Cash’ रिज़र्व में रखें। जब बाज़ार क्रैश होता है, तब TCS, Reliance, HDFC जैसी टॉप क्वालिटी कंपनियों के शेयर डिस्काउंट (सस्ते दाम) पर मिलते हैं। उस कैश का इस्तेमाल गिरावट में खरीदारी (Buy on Dips) के लिए करें।

4. मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में रहें (Blue-Chip Focus)

बाज़ार की गिरावट में सबसे पहले पेनी स्टॉक्स (Penny Stocks) और कमज़ोर कंपनियां तबाह होती हैं। अगर आपके पोर्टफोलियो में लार्ज-कैप (Large Cap) और डिविडेंड (Dividend) देने वाली मज़बूत कंपनियां हैं, तो वे क्रैश के दौरान कम गिरती हैं और बाज़ार सुधरने पर सबसे पहले ऊपर आती हैं।

Stock Shorts Conclusion:

दोस्तों, क्रैश बाज़ार का एक सामान्य हिस्सा है (जैसे मौसम का बदलना)। इससे डरें नहीं, बल्कि इसके लिए पहले से तैयारी करें। जो निवेशक क्रैश में टिक जाता है, वही लंबी अवधि में असली ‘वेल्थ’ (Wealth) बनाता है।

✍️ By Rishabh Singh | Stock Shorts

(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। मैं सेबी (SEBI) पंजीकृत निवेश सलाहकार नहीं हूँ। शेयर बाज़ार में निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। किसी भी वित्तीय फैसले से पहले अपने सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)

    Rishabh singh

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